सर्दियों के मौसम में खानपान
सर्द हवाओं ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बढ़ती सर्दी की चुनौतियों का सामना करने के दो तरीके हैं। पहला, घर में क्रोसिन और च्यवनप्राश का स्टाॅक बढ़ाना और दूसरा जो अध्कि बेहतर और आकर्षित करने वाला उपाय होगा, वह है भोजन। हालांकि भारत में सर्दियों के भोजन में सरसों का साग और मक्के की रोटी को विशेष अहमियत मिलती है, पर यहां आपको विंटर मेन्यू दिया जा रहा है जो आपको ठंड को चुनौती देने में मदद करेगा।
हम में से वे लोग जो अक्सर हर सर्दी के बाद अपने कुछ किलो बढ़ जाने वाले वजन पर हैरान रहते हैं, उनकी समस्या का समाध्न यहां है। पारा गिरने पर हमारा शरीर ठंड का मुकाबला करने के लिए ज्यादा खाने की मांग करता है। ठंड में बाॅडी को सक्रिय बनाए रखने की मांग अध्कि होती है, इसलिए ऊर्जा भी अध्कि खर्च होती है।
ऐसे में अध्कि खाने की इच्छा स्वभाविक रूप से बढ़ जाने वाली ऊर्जा की पूर्ति के लिए उत्पन्न होने लगती है। पर, बजाय इसके कि आप निरंतर खाने में लगे रहें ;जिसके कारण आपको अनावश्यक रूप से देर तक जिम में अभ्यास करना पड़ सकता हैद्ध, बेहतर होगा कि आप आदर्श सर्दियों के भोजन पर ध्यान दें-
प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थो को चुनें, मसाले और अदरक, लहसुन, काली मिर्च, दाल-चीनी, जावित्राी, जायपफल, केसर, तिल और गुड़ आदि चीजों का भरपूर सेवन करें, क्योंकि इससे शरीर की पाचन क्षमता को मजबूत होती है।
स उच्च पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन करें। खासतौर पर हरी सब्जियां जैसे ब्रोकोली, पालक आदि का सेवन अवश्य करें।
स सर्दियों में आसानी से होने वाली सर्दी और जुकाम से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोध्क क्षमता को मजबूत बनाना जरूरी होगा। मौसमी पफल व सब्जियां रोग प्रतिरोध्क क्षमता को बढ़ाने के सबसे कारगर उपाय हैं। इसके अलावा, सब्जियों में पालक, सरसों, बथुआ, चना, मूली पत्ता का सेवन करें जो कि उत्तर भारत में अध्कि पाए जाते हैं।
सरसों का साग, मक्की की रोटी को खास पसंद इसलिए किया जाता है कि मक्का में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है और थर्मोजेनेसिस का कारण होता है, जिससे शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। पालक और साग पोषक तत्वों से भरपूर मौसमी सब्जियां हैं। साग, पोषक तत्व और प्रोटीन से भरपूर होने के साथ रोग प्रतिरोध्क क्षमता को मजबूत बनाने वाला एक कंबो पैक है। इसके साथ आप सर्द से सर्द मौसम का मुकाबला कर सकते हैं।
गुड़-मूंगपफली की गजक और तिल और गुड़ की रेवड़ी व गजक भी इसी श्रेणी में आते हैं। तिल शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं, पाचन क्षमता को तेज कर रोग प्रतिरोध्क क्षमता को मजबूत बनाते हैं। गुड़ से पाचन में मदद मिलती है और कपफ और जुकाम से सुरक्षा होती है। पफूड हिस्टोरियन पुष्पेश पंत के अनुसार आहार में कुछ गर्म मसालों को शामिल करें। यह सदिर्यों में शरीर पर प्रभावी प्रभाव उत्पन्न करते हैं।
कहां क्या है खास
हमारे देश के हरेक हिस्से में सर्द मौसम से बचने के लिए कुछ न कुछ उपाय किए जाते हैं। उत्तर भारत में मुग़लई खानपान शैली में शोरबा हैं, दक्षिण भारत में रसम का चलन है। उत्तर भारत में दाल पालक का शोरबा मशहूर है। अन्य विकल्पों में टमाटर-ध्निया का शोरबा और जहांगीरी शोरबा भी हैं।
नई दिल्ली के दि इम्पीरियल के एग्जीक्युटिव शेपफ विशाल आत्रोय कहते हैं, ‘जहांगीरी शोरबा चिकन और केसर से बनता है। पूर्वोत्तर से आने वाले लोगों के बाद से केसर का चलन बढ़ा है। केसर में गर्म तत्व होते हैं और कश्मीरी कहवा में सूखे मेवों के साथ इसका कापफी इस्तेमाल होता है। कहवा में खुद भी ध्निया जैसे मसाले होते हैं जो गर्मी देते हैं।’
उत्तराखंड में सर्दियों में दाल को ‘तूर’ और ‘गहत’ तरीकों से पकाया जाता है। मुंबई स्थित न्यूट्रीशियनिस्ट और पफूड राइटर रुशिना मनशाॅ घिल्डियाल के अनुसार, ‘पहाड़ी लोगों को दाल पसंद है और यह उनकी रोजाना की खुराक का हिस्सा होता है। गढ़वाल क्षेत्रा में उड़द खासी पसंद की जाती है। इसमें अदरक डालने से यह अध्कि पाचक बन जाती है। परांठे बनाने के लिए भी पकी दाल का इस्तेमाल किया जाता है।’
सर्दियों के लिए विशेषज्ञों की राय
बीपी जांच कराते रहें
सर्दी के दिनों में वायरल इंपफेक्शंस की वजह से नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर छाती पर पड़ता है, इसलिए उससे जुड़ी बीमारियां ज्यादा होती हैं, लेकिन जब इसका दुष्प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है तो मेनिंजाइटिस, ग्विलेनबारी सिंड्रोम और पैरालेसिस का खतरा बढ़ जाता है। एक और खतरा जो सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, वह है लकवे का। दरअसल, ठंड में खून की नलियां सिकुड़ जाती हैं जिससे खून का प्रवाह अवरुद्घ हो जाता है। इससे उच्च रक्तचाप मरीजों में लकवे का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि समय-समय पर बीपी जांच कराते रहें।’
इस मौसम में परहेज जरूरी
सर्दी के मौसम को हेल्दी सीजन कहा जाता है क्योंकि इस मौसम में बीमारियां कम होती हैं। हां, इन दिनों ठंड, कपफ और अस्थमा सहित बच्चों में ब्रोन्क्योलाइटिस के मरीज ज्यादा देखने को मिलते हैं। बच्चों की सांस की छोटी नलियों में वायरल इंपफेक्शन की वजह से सूजन देखने को मिलती है। खुले में मिलने वाली खाने-पीने की चीजों से इस मौसम में भी परहेज जरूरी होता है, अन्यथा इससे न्यूरोसिस्टीसरकोसिस का खतरा रहता है।’

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